पंडित डॉ. मनीष शर्मा ने बताया दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त, प्रदोषकाल में शाम 5:04 से रात 8:17 बजे तक महालक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व
वृष स्थिर लग्न में शाम 6:08 से 8:04 बजे तक पूजन का विशेष योग, निशीथकाल और चौघड़िया मुहूर्त भी रहेंगे शुभ
दीपावली पर्व पर मां महालक्ष्मी के पूजन को लेकर इस वर्ष 8 नवंबर 2026, रविवार को विभिन्न शुभ मुहूर्त रहेंगे। ज्योतिष एवं धर्मशास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार दीपावली पर प्रदोषकाल में महालक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। पंडित डॉ. मनीष शर्मा ने दीपावली पूजन के शुभ मुहूर्त की जानकारी देते हुए बताया कि श्रद्धालु अपनी सुविधा और कुल परंपरा के अनुसार निर्धारित समयावधि में शास्त्रोक्त विधि से पूजन-अर्चन कर सकते हैं।
पंडित डॉ. शर्मा के अनुसार रविवार को कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के साथ अमावस्या तिथि के अवसर पर दीपावली पूजन के लिए दिन और रात्रि में कई शुभ योग बन रहे हैं। दिन में सुबह 11:28 बजे से 12:12 बजे तक अमृत चौघड़िया तथा दोपहर 1:35 बजे से 2:58 बजे तक शुभ चौघड़िया रहेगा। वहीं सूर्यास्त के बाद शाम 5:04 बजे से 7:08 बजे तक शुभ चौघड़िया और इसके बाद शाम 8:08 बजे तक अमृत चौघड़िया महालक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ठ माना गया है। रात्रि में 8:44 बजे से 10:08 बजे तक भी शुभ चौघड़िया रहेगा।
प्रदोषकाल में महालक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व
पंडित डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि धर्मशास्त्र के अनुसार सूर्यास्त के बाद प्रदोषकाल में दीपदान और महालक्ष्मी पूजन का विशेष विधान है। इस वर्ष प्रदोषकाल शाम 5:04 बजे से रात 8:17 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में शाम 6:08 बजे से रात 8:04 बजे तक वृष स्थिर लग्न रहेगा। इस स्थिर लग्न में श्री महालक्ष्मी का पूजन विशेष फलदायी माना गया है।
उन्होंने धर्मसिंधु के प्रमाण का उल्लेख करते हुए बताया कि ‘प्रदोषे दीपदानं लक्ष्मीपूजनादि विहितम्’ अर्थात प्रदोषकाल में दीपदान और लक्ष्मी पूजन का विधान बताया गया है। इसके अलावा दिन में गुरु की होरा सुबह 11:40 से दोपहर 12:13 बजे तक रहेगी। दोपहर 2:40 से शाम 5:39 बजे तक शुक्र, बुध और चंद्र की होरा तथा शाम 5:40 से रात 9:40 बजे तक भी इन शुभ ग्रहों की होरा रहेगी।
निशीथकाल और स्थिर लग्न में भी कर सकते हैं पूजन
रात्रि में पूजन के इच्छुक श्रद्धालुओं के लिए निशीथकाल रात 11:45 बजे से 12:37 बजे तक रहेगा। इस समय भी श्रीपूजन का विशेष महत्व बताया गया है। इसके अतिरिक्त मध्यरात्रि 12:35 बजे से रात 2:46 बजे तक सिंह स्थिर लग्न रहेगा। पंडित डॉ. शर्मा के अनुसार श्रद्धालु अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इन मुहूर्तों में भी पूजन कर सकते हैं।
गणेश, महाकाली, महालक्ष्मी, कुबेर और सरस्वती का करें पूजन
दीपावली पूजन में भगवान श्रीगणेश, महाकाली, मां महालक्ष्मी, कुबेर, इंद्र और महासरस्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने का विधान बताया गया है। महाकाली के अंतर्गत मूर्ति के साथ कलम, पेन और स्याही पात्र आदि का पूजन किया जा सकता है। मां महालक्ष्मी के साथ श्री यंत्र, महासरस्वती के साथ पुस्तकें, बहीखाते और पंचांग आदि का पूजन किया जाता है। इसी प्रकार कुबेर और इंद्र का भी पूजन-अर्चन किया जाता है। श्रद्धालु अपनी कुल परंपरा के अनुसार जप, पाठ और दीपदान करें।
नोटों की गड्डी और सामान्य सिक्कों की पूजा को बताया शास्त्रसम्मत नहीं
पंडित डॉ. मनीष शर्मा ने दीपावली पूजन को लेकर प्रचलित एक मान्यता पर विशेष ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि मां महालक्ष्मी की पूजा उनके मूर्ति स्वरूप अथवा चित्र के माध्यम से करनी चाहिए। केवल सोने-चांदी की मुद्राओं अथवा नोटों की गड्डियों का पूजन करना शास्त्रीय विधान के अनुरूप नहीं माना गया है। उन्होंने बताया कि मुद्रा को मां लक्ष्मी का प्रसाद और अनुग्रह माना गया है, इसलिए पूजन में मां महालक्ष्मी के श्रीविग्रह को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हालांकि वर्तमान में मां महालक्ष्मी और महासरस्वती की छाप वाले चांदी के सिक्के उपलब्ध हैं, उनका पूजन भी किया जा सकता है।
लक्ष्मी पूजन के बाद भोजन करने की परंपरा
धर्मसिंधु के उल्लेख के अनुसार लक्ष्मी पूजन के दिन बालक और वृद्धजनों को छोड़कर अन्य आस्तिकजनों के लिए दिन में भोजन नहीं करने तथा रात्रि में लक्ष्मी पूजन के बाद भोजन करने का विधान बताया गया है। पंडित डॉ. शर्मा ने बताया कि प्रदोषकाल में लक्ष्मी पूजन संपन्न करने के बाद रात्रि में भोजन करना चाहिए।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से दीपावली पर्व पर विधि-विधान, श्रद्धा और भक्ति के साथ मां महालक्ष्मी का पूजन करने तथा घर-परिवार में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करने की अपील की। पंडित डॉ. मनीष शर्मा ने समस्त नागरिकों को दीपावली पर्व की शुभकामनाएं दीं।


