इंदौर में अवैध वृद्धाश्रम सील, सागर में बिना अनुमति चल रहे नशा मुक्ति केंद्रों पर उठे सवाल

इंदौर में वृद्धजनों के साथ मारपीट की घटना के बाद जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई ने प्रदेशभर में बिना अनुमति संचालित संस्थानों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर प्रशासन ने बाणगंगा स्थित प्रेमाश्रय वृद्ध आश्रम की जांच कर उसे अवैध पाए जाने पर तत्काल सील कर दिया। आश्रम की संचालिका के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि नगर निगम के भवन में आश्रम का संचालन किसके आदेश से किया जा रहा था। आश्रम में रह रहे वृद्धजनों को मान्यता प्राप्त संस्थानों में स्थानांतरित कर दिया गया है।
— Gajendra Thakur (@kka_news) July 30, 2026
इधर, सागर जिले में भी बिना अनुमति संचालित नशा मुक्ति केंद्रों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार पथरिया जाट में स्थित आरोग्य नशा मुक्ति केंद्र पिछले कई वर्षों से संचालित हो रहा है। केंद्र में वर्तमान में भी नशे की लत से पीड़ित मरीज भर्ती हैं। सूत्रों के अनुसार प्रत्येक मरीज के परिजनों से उपचार और देखभाल के नाम पर हर माह लगभग 20 से 30 हजार रुपये तक की राशि ली जा रही है।

सागर में पथरिया जाट स्थित अरोग्य नशा मुक्ति केंद्र
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सागर के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आरोग्य नशा मुक्ति केंद्र को अब तक संचालन की वैधानिक अनुमति प्रदान नहीं की गई है। इसके बावजूद केंद्र का लगातार संचालन कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि केंद्र के पास आवश्यक अनुमति नहीं है तो वर्षों से इसका संचालन किसके संरक्षण में हो रहा है, इसकी निगरानी किस विभाग ने की और अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह जांच का विषय है।
इंदौर में अवैध वृद्धाश्रम पर हुई त्वरित कार्रवाई के बाद अब सागर में भी बिना अनुमति संचालित नशा मुक्ति केंद्रों की जांच की मांग तेज हो गई है। सामाजिक संगठनों और नागरिकों का कहना है कि नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती मरीज संवेदनशील स्थिति में होते हैं, ऐसे में केवल वैधानिक अनुमति प्राप्त और निर्धारित मानकों का पालन करने वाले संस्थानों को ही संचालन की अनुमति मिलनी चाहिए। यदि कोई संस्था बिना अनुमति वर्षों से संचालित हो रही है और मरीजों से बड़ी राशि वसूल रही है, तो संबंधित विभागों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई करनी चाहिए।


