बारिश की बेरुखी से सूखा राजघाट, सागर की जल जीवन रेखा पर संकट, वर्षों से गहरीकरण के दावे हवा-हवाई

बारिश की बेरुखी से सूखा राजघाट, सागर की जल जीवन रेखा पर संकट, वर्षों से गहरीकरण के दावे हवा-हवाई

✍️ गजेंद्र ठाकुर- सागर। लगातार हो रही कम वर्षा का असर अब सागर शहर की जल व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। शहर की जल जीवन रेखा माने जाने वाला राजघाट बांध लगभग खाली होने की स्थिति में पहुंच गया है। जल स्तर लगातार घटने से नगर निगम की चिंता बढ़ गई है और आने वाले दिनों में शहरवासियों के सामने गंभीर जल संकट खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है।

गहरीकरण के जुमले

सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्षों से राजघाट बांध के गहरीकरण, जल संरक्षण और वैकल्पिक जल स्रोत विकसित करने की बातें होती रहीं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस काम नजर नहीं आया। हर साल बारिश के मौसम के पूर्व बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन गर्मी या कम वर्षा होते ही पूरा तंत्र जल संकट से जूझने लगता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दीर्घकालिक योजना के बजाय केवल अस्थायी उपायों पर ही जोर दिया गया।

नगर निगम के उपायुक्त श्री बघेल ने बताया कि राजघाट में दूर-दराज के हिस्से में जितना पानी शेष है, उसे लिफ्ट किया जा रहा हैं पंप हाउस तक उनके अनुसार वर्तमान स्थिति में लगभग 30 दिनों का पानी उपलब्ध है, जिससे सागर शहर, मकरोनिया और केंट क्षेत्र में जलापूर्ति की जा सकती है।

मकरोनिया की आपूर्ति होगी बंद

उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम जल्द ही मकरोनिया क्षेत्र की जलापूर्ति बंद करने पर विचार कर रहा है, क्योंकि वहां से लंबे समय से जल कर का भुगतान नहीं किया गया है। यदि ऐसा होता है तो हजारों लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

इधर शहर के नागरिक पहले से ही अनियमित जलापूर्ति से परेशान हैं। कई मोहल्लों में सप्ताह में केवल दो या तीन बार ही पानी पहुंच रहा है। कभी टंकियों की सफाई का कारण बताया जाता है तो कभी पाइपलाइन सुधार या अन्य तकनीकी कार्यों का हवाला देकर जलापूर्ति प्रभावित की जाती है। ऐसे में अब राजघाट में पानी की कमी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

सवाल यह भी उठ रहा है कि स्मार्ट सिटी का दर्जा प्राप्त सागर में यदि मुख्य जल स्रोत ही सूखने की कगार पर पहुंच जाए और वैकल्पिक व्यवस्था समय रहते तैयार न हो सके, तो आखिर विकास के दावों का लाभ आम नागरिकों को कैसे मिलेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि केवल संकट के समय पानी लिफ्ट करने जैसी अस्थायी व्यवस्थाओं से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए जल संरक्षण, बांधों के गहरीकरण, वर्षा जल संग्रहण और नई जल परियोजनाओं पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।

फिलहाल शहरवासियों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले दिनों में सागर में पेयजल संकट और गहरा सकता है। वहीं नागरिक यह सवाल भी पूछ रहे हैं कि आखिर हर वर्ष जल संकट आने के बाद ही प्रशासन और नगर निगम क्यों जागते हैं, जबकि स्थायी समाधान की मांग वर्षों से की जा रही है।

शेष- शहर में स्थित पुराने जल स्त्रोतों को पटरी पर लाने करोड़ो रूपये लगा दिए गए जल्द ही विस्तृत रपट।

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