कभी बाघों के लिए तरसा अचानकमार, अब MP के बाघों से गुलजार हुआ जंगल; 10 के पार पहुंची संख्या

कभी बाघों के लिए तरसा अचानकमार, अब MP के बाघों से गुलजार हुआ जंगल; 10 के पार पहुंची संख्या

कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच से प्राकृतिक कॉरिडोर के जरिए पहुंचे बाघ-बाघिनों ने बढ़ाया कुनबा, बांधवगढ़ की ‘झुमरी’ ने 4 नए शावकों को दिया जन्म

कभी बाघों की कमी से जूझ रहे छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व में अब मध्य प्रदेश से प्राकृतिक रूप से पहुंच रहे बाघों ने नई उम्मीद जगाई है। कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच टाइगर रिजर्व से बाघ-बाघिन जंगलों के बीच बने प्राकृतिक कॉरिडोर के जरिए खुद अचानकमार पहुंच रहे हैं। यहां पहुंचकर वे अपना क्षेत्र बना रहे हैं और प्रजनन के जरिए बाघों की संख्या बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।

बाघों के इस प्राकृतिक आवागमन को देखते हुए छत्तीसगढ़ ने फिलहाल मध्य प्रदेश से बाघ मंगाने के प्रस्ताव को रोक दिया है। अब प्राकृतिक रूप से अचानकमार पहुंच रहे बाघ ही वहां की आबादी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

बांधवगढ़ से पहुंची ‘झुमरी’ ने बढ़ाया कुनबा

मध्य प्रदेश से तीन बाघिन और एक बाघ के अचानकमार टाइगर रिजर्व पहुंचकर अपना क्षेत्र बनाने की जानकारी सामने आई है। इनमें बांधवगढ़ की बाघिन ‘झुमरी’ भी शामिल है। साल 2021 में करीब 400 किलोमीटर की दूरी तय कर झुमरी अचानकमार पहुंची थी। यहां आने के बाद उसने अब तक तीन बार शावकों को जन्म दिया है। हाल ही में उसने चार नए शावकों को जन्म दिया, जिसके साथ वह अब तक कुल सात शावकों को जन्म दे चुकी है।

इसी तरह साल 2023 में कान्हा टाइगर रिजर्व से बाघ ‘टी-200’ और पेंच टाइगर रिजर्व से बाघिन ‘गंगा’ भी अचानकमार पहुंची थीं। मध्य प्रदेश से घायल अवस्था में पहुंची एक अन्य बाघिन का उपचार किया गया। स्वस्थ होने के बाद उसे ‘आशा’ नाम दिया गया।

2010 में सिर्फ एक बाघ था, अब संख्या 10 के पार

अचानकमार टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बाघों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2010 में यहां सिर्फ एक बाघ मौजूद था। वर्ष 2014 में यह संख्या बढ़कर तीन और 2018 में पांच हो गई। अब अचानकमार में बाघों की संख्या 10 तक पहुंच चुकी है।

इसका असर पूरे छत्तीसगढ़ में भी दिखाई दे रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में राज्य में कुल 17 बाघ दर्ज किए गए थे। अप्रैल 2025 तक यह संख्या बढ़कर 35 हो गई।

बाघों के लिए प्राकृतिक कॉरिडोर बचाना जरूरी

अचानकमार टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर प्रियंका पांडेय के अनुसार, मध्य प्रदेश से यहां पहुंचे बाघ और बाघिनों ने प्रजनन के जरिए अचानकमार की बाघ आबादी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वहीं, मध्य प्रदेश के पीसीसीएफ शुभरंजन सेन का कहना है कि बाघों के बीच जीन पूल के आदान-प्रदान और उनकी आबादी को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने के लिए प्राकृतिक कॉरिडोर बेहद महत्वपूर्ण हैं।

इन कॉरिडोर का एक हिस्सा इंसानी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है। ऐसे में रास्तों में आने वाली रुकावटें बाघों के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। इसलिए बाघों के सुरक्षित आवागमन के लिए प्राकृतिक कॉरिडोर की सुरक्षा के साथ जंगलों के बेहतर प्रबंधन और संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here