सागर शराबकांड का असर जबलपुर तक पहुंचा, ‘सागर गोल्ड’ पर रोक लगाने वाले अफसर से मांगा जवाब

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सागर के बंडा में जहरीली शराब से मौतों को आधार बनाकर जबलपुर में बिक्री रोकने का आदेश जारी किया था। विभाग ने बिना रासायनिक जांच के शराब को जहरीला बताने और सक्षम अनुमति नहीं लेने पर 15 दिन में जवाब मांगा है।

भोपाल। सागर जिले के बंडा में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों के बीच जबलपुर में सागर गोल्ड ब्रांड की शराब की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी करना सहायक आबकारी आयुक्त जबलपुर संजीव दुबे के लिए परेशानी का कारण बन गया है। वाणिज्यिक कर विभाग ने उनके इस कदम को मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के विपरीत मानते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

जानकारी के अनुसार, संजीव दुबे ने छह सितंबर को जबलपुर जिले में सागर गोल्ड ब्रांड की शराब की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित करने का आदेश जारी किया था। इस आदेश में सागर जिले के बंडा में हुई घटना का हवाला देते हुए संबंधित शराब को जहरीला बताया गया था और उसके सेवन से लोगों की मौत का उल्लेख किया गया था।

विभाग ने नोटिस में इस आदेश पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि शराब को जहरीला घोषित करने से पहले उसका कोई रासायनिक परीक्षण नहीं कराया गया था। इसके अलावा, किसी प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं थी। विभाग के मुताबिक, इस तरह की कार्रवाई से पहले सक्षम प्राधिकारी से अनुमति या निर्देश लेना भी जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

15 दिन में देना होगा लिखित जवाब

वाणिज्यिक कर विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए संजीव दुबे से 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत जारी किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा में जवाब नहीं मिलने की स्थिति में मामले में एकपक्षीय निर्णय लिया जा सकता है।

नोटिस जारी होने के बाद सहायक आबकारी आयुक्त ने अपने पहले जारी आदेश में बदलाव कर दिया है।

दो दिन में 7,825 लीटर अवैध शराब जब्त

इधर, आबकारी विभाग ने अवैध शराब के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान दो दिनों में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग के अनुसार इस दौरान कुल 7,825 लीटर शराब जब्त की गई।

कार्रवाई में अवैध तरीके से शराब तैयार करने, उसका परिवहन और बिक्री करने के साथ ही मानवीय उपयोग के लिए अनुपयुक्त शराब के आयात तथा विकृत स्पिरिट से संबंधित गतिविधियों के खिलाफ भी प्रकरण बनाए गए हैं। विभाग ने इन अवैध गतिविधियों में शामिल 636 लोगों को आरोपित बनाया है।

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