सागर गोल्ड नकली शराब बनाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, 37 आरोपी गिरफ्तार

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बंडा में जहरीली शराब से मौतों के बाद जांच में खुलासा; ग्वालियर से दिल्ली तक फैला था नेटवर्क, बड़ी मात्रा में बोतलें और मशीनें बरामद

सागर। बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले की जांच के दौरान सागर पुलिस ने नकली और अमानक शराब तैयार कर बेचने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह ‘सागर गोल्ड’ नाम से नकली शराब तैयार कर उसे अलग-अलग गांवों में खपाता था। मामले में पुलिस ने अब तक 52 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें से 37 की गिरफ्तारी हो चुकी है।

कार्रवाई के दौरान पुलिस को नकली शराब तैयार करने और उसकी पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला सामान भी मिला है। मौके से चार डाई मशीन, बोतलों के ढक्कन सील करने वाली मशीन, 11,050 खाली बोतलें, 250 प्लास्टिक कैप्सूल सहित पैकिंग से जुड़ी सामग्री जब्त की गई है।

पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के निर्देशन में एएसपी बीना जयवीर सिंह भदौरिया और एएसपी सागर नरेन्द्र सोलंकी के नेतृत्व में अलग-अलग पुलिस टीमों ने कार्रवाई की। पुलिस ने मुखबिरों से मिली सूचनाओं के साथ तकनीकी साक्ष्यों को जोड़कर गिरोह तक पहुंच बनाई।

6 सितंबर को मिली थी जहरीली शराब की सूचना

मामला 6 सितंबर को उस समय सामने आया, जब पुलिस को बंडा थाना क्षेत्र के गांवों में शराब पीने के बाद कई लोगों की मौत की सूचना मिली। इसके बाद थाना बंडा और थाना विनायका में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपी रवि लखेरा से पूछताछ में पुलिस को गिरोह के काम करने के तरीके से जुड़ी जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार रवि ने बताया कि उसने मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर और आशीष साहू के साथ मिलकर लाइसेंसी शराब दुकान की आड़ में नकली शराब बेचने की योजना बनाई थी।

वहीं, चंदू राजा उर्फ चंद्रभान ने पूछताछ में बताया कि विनायका के लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा और बरेठी दुकान के मनीष ठाकुर के साथ उसकी अघोषित पार्टनरशिप थी।

जांच में यह भी सामने आया कि ग्राम छापरी निवासी शिवांजय राजपूत और उसके दोस्त रोहित पटैल ने मुरैना निवासी दिनेश शिवहरे से संपर्क किया था। पुलिस के मुताबिक दोनों ने ततरवारा गांव में नकली शराब तैयार करने की योजना पर बात की थी।

इसके बाद दिनेश शिवहरे अपने भाई छोटू उर्फ ललित, देवा जाटव, विक्रम, टिंकू, लल्ला जाटव, दीपक शर्मा और सागर जाटव के साथ बंडा पहुंचा। नकली शराब की पैकिंग के लिए रैपर, खाली बोतल, ढक्कन, कार्टून और सील मशीन ग्वालियर से ट्रांसपोर्ट के जरिए मंगाई गई थी। पुलिस के अनुसार यह सामान चंदू राजा के घर पर रखा गया था। शराब तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला लिक्विड थिनर दिल्ली से मंगाया गया था।

ततरवारा से आसपास के गांवों तक पहुंचाई जाती थी शराब

पुलिस की जांच के मुताबिक ततरवारा में चंदू राजा के घर पर नकली शराब तैयार की जाती थी। इसके बाद नौराज, गूगरा, छापरी, जगथर, बमूराभेड़ा और पाटन समेत आसपास के गांवों में कमीशनदारों के माध्यम से इसकी बिक्री की जाती थी।

जांच में सामने आया है कि इसी शराब के सेवन के बाद दिनेश शिवहरे की तबीयत बिगड़ी थी। बंसल अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उसे मुरैना ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। वहीं देवा जाटव की आंखों की रोशनी चली गई।

ग्वालियर और मुरैना में कार्रवाई, खाली बोतलों का बड़ा स्टॉक मिला

गिरोह की कड़ियां तलाशते हुए पुलिस टीम ने मुरैना और ग्वालियर में भी दबिश दी। कार्रवाई के दौरान दिनेश शिवहरे के भाई ललित उर्फ छोटू, विक्रम, लल्ला और टिंकू को गिरफ्तार किया गया।

आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने ग्वालियर के जेवरा का पुरा, बहोड़ापुर में दबिश देकर राजू सेंगर को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से 11,050 खाली बोतलें और डाई मशीनें बरामद की गईं।

इसी क्रम में राय कॉलोनी, बहोड़ापुर स्थित पंकज राय की फैक्ट्री पर भी पुलिस ने कार्रवाई की। यहां से 180 एमएल की बोतल तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली दो डाई मशीनें जब्त की गईं।

दिल्ली से सागर पहुंचा था इंडस्ट्रियल स्पिरिट थिनर

नकली शराब तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले लिक्विड की सप्लाई की पड़ताल के दौरान पुलिस को दिल्ली तक नेटवर्क जुड़े होने की जानकारी मिली। जांच के आधार पर दिल्ली स्थित RN केमिकल फर्म के संचालक अनुपम गिरी पिता रामनारायण गिरी, निवासी कराला को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के मुताबिक अनुपम गिरी ने पांच ड्रम इंडस्ट्रियल स्पिरिट थिनर सागर भेजे थे। इस सप्लाई की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है।

पुलिस का कहना है कि गिरोह अधिक मुनाफा कमाने के लिए आसानी से उपलब्ध होने वाले नशीले तरल पदार्थों का इस्तेमाल कर नकली शराब तैयार करता था। इसके लिए ऐसे गांवों को चुना जाता था, जहां प्रभावशाली लोगों का दबदबा हो और शिकायत की स्थिति में दबाव बनाया जा सके।

फिलहाल पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। जांच आगे बढ़ने के साथ नकली शराब की सप्लाई और नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका भी सामने आने की उम्मीद है।

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