MP News: सागर में पुलिस के ऑनलाइन रिकॉर्ड में गड़बड़ी की शिकायत, एक से अधिक FIR के बावजूद पोर्टल पर एक ही केस दर्ज जैसे मामलें भी सामने आए

सागर में ऑनलाइन अपराध रिकॉर्ड पर सवाल, कई FIR के बावजूद पोर्टल पर एक ही मामला दिखने की शिकायत

आरोपी के नाम मे स्पेलिंग्स उर्फ आदि से दिक्कत, पुराने अपराध भी ऑनलाइन रिकॉर्ड से बाहर, CCTNS की डेटा एंट्री और रिकॉर्ड मिलान की समीक्षा जरूरी

सागर। जिले में पुलिस थानों में दर्ज होने वाले अपराधों का ऑनलाइन रिकॉर्ड सवालों के घेरे में है। अलग-अलग थानों में एक ही व्यक्ति के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज होने के बावजूद ऑनलाइन चरित्र सत्यापन से जुड़ी जानकारी में सभी मामले प्रदर्शित नहीं होने की शिकायत सामने आ रही है। कहीं आरोपी का नाम और पिता का नाम अलग-अलग दर्ज है, तो कहीं पता या उपनाम में अंतर दिखाई देता है। कई मामलों में आरोपी की फोटो का कॉलम भी खाली है। इसके अलावा वर्ष 2010 से पहले दर्ज हुए कई अपराधों का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड अधूरा होने पर किसी व्यक्ति के आपराधिक इतिहास की सही जानकारी कैसे सामने आएगी?

तीन FIR दर्ज, ऑनलाइन रिकॉर्ड में एक ही मामला दिखने की स्थिति

पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज होने के बाद संबंधित जानकारी डिजिटल प्रणाली में दर्ज की जाती है। लेकिन यदि एक ही व्यक्ति के खिलाफ अलग-अलग थानों में दर्ज मामलों में नाम, पिता का नाम या पता अलग-अलग तरीके से दर्ज हो जाए, तो रिकॉर्ड खोजने और मामलों का आपस में मिलान करने में कठिनाई हो सकती है।

उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ तीन अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज हैं, लेकिन ऑनलाइन पोर्टल पर केवल एक मामला दिखाई देता है, तो संबंधित व्यक्ति के आपराधिक इतिहास की अधूरी जानकारी सामने आ सकती है। हालांकि, केवल पोर्टल पर एक मामला दिखाई देने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बाकी एफआईआर पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हैं। इसकी पुष्टि संबंधित थानों के रिकॉर्ड और ऑनलाइन डेटाबेस की जांच से ही हो सकती है।

नाम के साथ ‘उर्फ’ और दूसरे विवरणों में अंतर से पहचान पर सवाल

आरोपियों के नाम दर्ज करने में एकरूपता नहीं होने से भी रिकॉर्ड खोजने में परेशानी हो सकती है। कुछ मामलों में नाम के साथ ‘उर्फ’ जुड़ा होता है, जबकि दूसरे मामले में उपनाम या अन्य पहचान संबंधी विवरण अलग तरीके से दर्ज किए जाते हैं। पिता का नाम और पता भी अलग-अलग दर्ज होने पर एक ही व्यक्ति से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान प्रभावित हो सकता है।

तकनीकी रूप से नाम के आधार पर खोज करना और किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। सही मिलान के लिए उपलब्ध पहचान संबंधी विवरणों की जांच जरूरी होती है। ऐसे में पुलिस रिकॉर्ड में नाम, पिता का नाम, पता और उपनाम सही तरीके से दर्ज करना महत्वपूर्ण है, ताकि अलग-अलग मामलों की जानकारी खोजने में अनावश्यक कठिनाई न आए। हालांकि, किसी विशेष रिकॉर्ड में विसंगति का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

आरोपी की फोटो गायब, वर्ष 2010 से पहले के अपराध भी नहीं दिख रहे

ऑनलाइन रिकॉर्ड में आरोपी की फोटो का कॉलम खाली होना भी एक महत्वपूर्ण सवाल है। फोटो उपलब्ध नहीं होने से रिकॉर्ड में दर्ज व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करने में अतिरिक्त कठिनाई हो सकती है। इसके अलावा, वर्ष 2010 से पहले दर्ज कई पुराने अपराधों के ऑनलाइन सिस्टम में अपडेट नहीं होने की जानकारी भी सामने आई है।

यदि पुराने मामलों का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है या नए मामलों में आरोपी का विवरण अधूरा दर्ज हुआ है, तो ऑनलाइन खोज के परिणाम संबंधित व्यक्ति के पूरे आपराधिक इतिहास को प्रदर्शित नहीं कर सकते। हालांकि, यह पता लगाने के लिए कि संबंधित मामले वास्तव में डिजिटल रिकॉर्ड से बाहर हैं या केवल किसी विशेष पोर्टल पर दिखाई नहीं दे रहे, तकनीकी जांच जरूरी है।

CCTNS क्या है और रिकॉर्ड में गलती से क्या परेशानी हो सकती है?

CCTNS का पूरा नाम Crime and Criminal Tracking Network & Systems है। यह केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की परियोजना है, जिसका उद्देश्य देशभर के पुलिस थानों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना और अपराध तथा अपराधियों से संबंधित जानकारी के संग्रह, खोज और आदान-प्रदान को आसान बनाना है।

इस प्रणाली के माध्यम से एफआईआर, विवेचना और अन्य पुलिस रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में दर्ज करने की व्यवस्था है। इसमें डेटा की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी मामले में आरोपी का नाम, पिता का नाम, पता या अन्य विवरण गलत दर्ज होता है, तो रिकॉर्ड खोजने और अलग-अलग मामलों में एक ही व्यक्ति की पहचान का मिलान करने में कठिनाई हो सकती है। इसी तरह, पुराने रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण नहीं होना या संबंधित जानकारी का अद्यतन नहीं होना भी ऑनलाइन खोज के परिणामों को प्रभावित कर सकता है।

यहां यह समझना जरूरी है कि CCTNS में एफआईआर दर्ज होना, किसी दूसरे पोर्टल पर उसका प्रदर्शित होना और किसी व्यक्ति के सभी मामलों का एक साथ मिल जाना तीन अलग-अलग तकनीकी पहलू हैं। इसलिए ऑनलाइन रिकॉर्ड में किसी मामले का दिखाई नहीं देना अपने आप में यह प्रमाण नहीं है कि एफआईआर दर्ज नहीं हुई या पुलिस ने उसे जानबूझकर छिपाया है। संबंधित डेटाबेस, रिकॉर्ड की स्थिति और पोर्टल की कार्यप्रणाली की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

सीएसपी कश्यप बोले- पुराने अपराध अपडेट नहीं, नए मामलों में भी कमियां

सागर नगर पुलिस अधीक्षक ललित कश्यप ने बताया कि वर्ष 2010 से पहले के कुछ अपराध सीसीटीएनएस में अपडेट न हुए हो जाँच कराएंगे वहीं, कुछ नए मामलों में भी एफआईआर दर्ज करते समय आरोपी की फोटो और सही नाम उपलब्ध नहीं होने जैसी स्थितियां सामने आती हैं। इसके कारण ऑनलाइन रिकॉर्ड में अपराधों की संख्या कम दिखाई देने की संभावना हो सकती है। उन्होंने कहा कि थानों को निर्देश दिए जाएंगे कि संबंधित डेटा की जांच कर उसे दुरुस्त किया जाए।

रिकॉर्ड सुधारने के लिए जरूरी है व्यापक समीक्षा

मामले में अब जरूरत इस बात की है कि जिले के सभी थानों में दर्ज एफआईआर और ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए। पुराने मामलों के डिजिटलीकरण की स्थिति की समीक्षा हो और जिन प्रकरणों में आरोपी का नाम, पिता का नाम, पता या फोटो अधूरा है, उनमें उपलब्ध मूल अभिलेखों के आधार पर सुधार किया जाए। साथ ही, एक ही व्यक्ति के खिलाफ अलग-अलग थानों में दर्ज मामलों की पहचान और रिकॉर्ड मिलान की व्यवस्था भी जांची जाए।

गृह मंत्रालय की CCTNS और एकीकृत आपराधिक न्याय प्रणाली (ICJS) संबंधी जानकारी में डेटा की गुणवत्ता बढ़ाने तथा अलग-अलग एजेंसियों के रिकॉर्ड को आपस में जोड़ने पर जोर दिया गया है, ऐसे में सागर जिले में भी रिकॉर्ड की शुद्धता और अद्यतन स्थिति की समीक्षा से ऑनलाइन जानकारी को अधिक विश्वसनीय बनाने में मदद मिल सकती है।

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