हफसीली डेयरी परियोजना का संभागायुक्त दिलीप कुमार ने किया निरीक्षण, बम्होरी रेंगुआ से सड़क जल्द मोटरेबल बनाने के निर्देश

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निगमायुक्त राजकुमार खत्री के साथ लिया जायजा, डेयरी संचालकों से चर्चा कर सुविधाओं और पहुंच मार्ग की जानकारी ली

सागर। सागर शहर को पशु विचरण से मुक्त करने और शहर में स्वच्छता, सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से संचालित हफसीली डेयरी विस्थापन परियोजना का नवागत सागर संभागायुक्त दिलीप कुमार ने निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ निगमायुक्त राजकुमार खत्री भी मौजूद रहे।

संभागायुक्त ने हफसीली ग्राम स्थित डेयरी विस्थापन स्थल पर चल रहे विकास कार्यों और डेयरी संचालकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने वहां डेयरी संचालित कर रहे दुग्ध व्यापारियों से सीधे बातचीत की और यह जाना कि परियोजना स्थल पर डेयरी संचालन को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए किन व्यवस्थाओं की जरूरत है।

डेयरी संचालकों ने बम्होरी रेंगुआ की ओर से परियोजना स्थल तक पहुंच मार्ग को बेहतर बनाने की आवश्यकता बताई। इस पर संभागायुक्त श्री दिलीप कुमार ने संबंधित अधिकारियों को सड़क के व्यवस्थित निर्माण के लिए आवश्यक सर्वे और तैयारियां करने के निर्देश दिए। उन्होंने तत्काल आवागमन शुरू कराने के लिए सड़क पर मुरम आदि डालकर उसे मोटरेबल बनाने को भी कहा, ताकि डेयरी संचालकों और अन्य लोगों को आने-जाने में परेशानी न हो।

संभागायुक्त ने नगर निगम प्रशासन को हफसीली डेयरी विस्थापन स्थल पर उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं को और बेहतर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना स्थल पर डेयरी संचालकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर मजबूत किया जाए।

निगमायुक्त श्री राजकुमार खत्री ने बताया कि हफसीली डेयरी विस्थापन स्थल पर बिजली, पेयजल, ड्रेनेज, सड़क सहित अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की गई हैं। पशु चिकित्सा से संबंधित व्यवस्थाओं को भी आवश्यकता के अनुसार दुरुस्त किया गया है, ताकि यहां डेयरी स्थानांतरित करने वाले पशु मालिक आसानी से अपना व्यवसाय संचालित कर सकें।

परियोजना का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद डेयरी संचालकों को भूखंड आवंटित कर शहर से डेयरियों को विस्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। कुछ संचालकों ने हफसीली में टीनशेड और पक्के निर्माण कराकर अपनी डेयरियां भी शुरू कर दी हैं।

हालांकि, नगर निगम के जांच दल द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में परियोजना स्थल पर आवंटित कुल 264 प्लॉटों की जांच की गई। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि 155 डेयरी संचालकों ने प्लॉट आवंटन और नोटिस मिलने के बावजूद न तो शेड का निर्माण कराया और न ही अपनी डेयरी को पूरी तरह हफसीली स्थानांतरित किया।

नगर निगम के अनुसार, एमआईसी और परिषद की बैठकों में लिए गए निर्णयों के बावजूद इन डेयरी संचालकों द्वारा लापरवाही बरती गई। इनमें कुछ संचालकों ने अपने पशुओं को हफसीली नहीं पहुंचाया, जबकि कुछ ने शहर में वापस आकर अवैध रूप से डेयरी संचालन शुरू कर दिया।

ऐसे मामलों में नगर निगम द्वारा कार्रवाई की जा रही है। संबंधित डेयरी संचालकों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ उनके पशुओं को जब्त करने की कार्रवाई भी की जा रही है। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन कर अवैध रूप से डेयरी संचालित करने वाले लोगों के घरों में नगर निगम की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को समाप्त करने की कार्रवाई भी की जा रही है।

नगर निगम प्रशासन ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले डिफाल्टर डेयरी संचालकों के आवंटन निरस्त करने और उनके द्वारा जमा राशि राजसात करने की प्रक्रिया भी की जा रही है। जिन डेयरी संचालकों के भूखंडों की रजिस्ट्री हो चुकी है, उनके द्वारा नियमों का उल्लंघन किए जाने की स्थिति में रजिस्ट्री शून्य कराने के लिए जिला रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, विस्थापन की प्रतीक्षा कर रहे नए आवेदकों को भूखंड उपलब्ध कराने के लिए नगर निगम ने विशेष टीम गठित की है। टीम के माध्यम से जरूरतमंद और इच्छुक डेयरी संचालकों को जल्द से जल्द स्थान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त डॉ. एस.एस. बघेल, नगर निगम राजस्व अधिकारी, कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री, उपयंत्री सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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