राजघाट में जलमग्न गणेश प्रतिमाएं निकालीं, विधि-विधान से विसर्जन की तैयारी

राजघाट में जलमग्न गणेश प्रतिमाएं निकालीं, विधि-विधान से विसर्जन की तैयारी

संकल्प फाउंडेशन ने चलाया सफाई अभियान, पीओपी से बनी प्रतिमाएं होने की आशंका; पर्यावरण संरक्षण के लिए कुंड बनाने की योजना

सागर। राजघाट बांध में गणेश विसर्जन के कई दिनों बाद भी प्रतिमाएं जल में पड़ी मिलने पर संकल्प फाउंडेशन ने रविवार को सफाई अभियान चलाया। संगठन के सदस्यों ने स्थानीय केयरटेकरों के सहयोग से जल से गणेश प्रतिमाओं और पूजन सामग्री को बाहर निकाला। प्रतिमाएं लगभग पूर्ववत अवस्था में मिलने के बाद उनके प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से निर्मित होने की आशंका जताई गई।

संकल्प फाउंडेशन के अध्यक्ष रिशांक तिवारी ने बताया कि स्थानीय नागरिकों से राजघाट में विसर्जित गणेश प्रतिमाओं के लंबे समय तक जल में पड़े रहने की जानकारी मिली थी। इसके बाद संगठन ने अभियान चलाकर प्रतिमाओं को बाहर निकालने और उनके उचित निस्तारण की पहल की।

रिशांक तिवारी ने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखना भी जरूरी है। जिस श्रद्धा और सम्मान के साथ भगवान गणेश को घर लाया जाता है, उसी सम्मान के साथ उनकी विदाई भी होनी चाहिए। विसर्जन के बाद प्रतिमाओं को जल में लावारिस छोड़ना उचित नहीं है। सनातन संस्कृति आस्था के साथ प्रकृति के सम्मान का भी संदेश देती है।

उन्होंने बताया कि निकाली गई प्रतिमाओं के उचित निस्तारण के लिए संगठन के सदस्यों के साथ चर्चा कर एक कुंड बनाने की योजना तैयार की गई है। इसके माध्यम से धार्मिक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रतिमाओं का निस्तारण करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।

फाउंडेशन ने नागरिकों से अपील की कि धार्मिक आयोजनों के बाद प्रतिमाओं और पूजन सामग्री का उचित तरीके से निस्तारण करें तथा जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग दें। रिशांक तिवारी ने कहा कि शहर में कहीं भी स्वच्छता अभियान की आवश्यकता होने पर संगठन को जानकारी दी जा सकती है। संकल्प फाउंडेशन जनसहयोग से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार प्रयास करता रहेगा।

अभियान में आदर्श टिंकू साहू, हेमांशु साहू, भास्कर मुखरिया, प्रयांशु, शिवांक तिवारी सहित फाउंडेशन के सदस्य और राजघाट के स्थानीय नागरिक शामिल रहे। संगठन की इस पहल के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति की रक्षा और जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने का संदेश दिया गया।

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