सागर में अंतिम विदाई भी हुई मजबूरी, मुढ़िया से ट्रैक्टर-ट्रॉली में खुरई पहुंचा शव

0

शमशान के लिए जमीन होने के बावजूद रास्ते की बदहाली और अतिक्रमण से परेशान ग्रामीण, बारिश में बढ़ जाती है समस्या

सागर/खुरई। क्षेत्र के मुढ़िया गांव में मूलभूत सुविधाओं के विकास को लेकर किए जा रहे दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। गांव में शमशान घाट के लिए जमीन मौजूद है, लेकिन वहां तक पहुंचने वाला रास्ता बारिश में इतना खराब हो गया है कि ग्रामीणों के लिए शव को शमशान तक ले जाना भी मुश्किल हो गया है। वहीं, शमशान की जमीन के बड़े हिस्से पर अतिक्रमण होने की बात भी ग्रामीणों ने कही है।

इसी परेशानी का एक उदाहरण शनिवार को सामने आया, जब मुढ़िया गांव निवासी 75 वर्षीय गुलाब सिंह लोधी की बीमारी के चलते मौत हो गई। परिजन और ग्रामीण उनका अंतिम संस्कार गांव के ही शमशान घाट में करना चाहते थे, लेकिन बारिश के कारण रास्ते की स्थिति बेहद खराब होने से शव को वहां तक ले जाना संभव नहीं हो सका।

मजबूरी में ग्रामीणों ने शव को तिरपाल से ढककर ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखा और अंतिम संस्कार के लिए खुरई लेकर पहुंचे। शव के साथ परिवार और अन्य ग्रामीण भी ट्रैक्टर-ट्रॉली से खुरई पहुंचे। इस तरह शवयात्रा को देखकर रास्ते से गुजर रहे लोग भी हैरान रह गए।

ग्रामीणों के मुताबिक, गांव से शमशान घाट तक जाने वाला रास्ता बारिश में पूरी तरह कीचड़ से भर जाता है। कई जगह घुटनों तक कीचड़ होने के कारण पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में शव को लेकर शमशान तक पहुंचना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

शमशान के लिए 2 से ढाई एकड़ जमीन

ग्रामीणों का कहना है कि मुढ़िया गांव में शमशान के लिए करीब 2 से ढाई एकड़ जमीन दर्ज है, लेकिन इसके बावजूद वहां शमशान घाट का समुचित विकास नहीं हो पाया। आरोप है कि जमीन के एक हिस्से पर दबंगों ने अतिक्रमण कर रखा है। इसके चलते अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त स्थान भी उपलब्ध नहीं हो पाता।

बारिश के दौरान रास्ते में कीचड़ और पानी भरने से समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर कई बार शिकायत की गई और जमीन का सीमांकन कराने के प्रयास भी हुए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

सरपंच बोले- अधिकारियों से कई बार की शिकायत

ग्राम पंचायत के सरपंच क्रोध विश्वकर्मा ने बताया कि शमशान की जमीन और वहां तक पहुंचने वाले रास्ते की समस्या को लेकर अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। जमीन का सीमांकन कराकर शमशान घाट का निर्माण शुरू कराने का प्रयास भी किया गया, लेकिन कथित अतिक्रमण के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया।

बारिश में बुजुर्गों को भी होती है परेशानी

मुढ़िया गांव के बृजलाल लोधी और मूरत सिंह लोधी ने बताया कि शमशान तक पहुंचने वाला रास्ता सामान्य दिनों में भी परेशानी का कारण बना रहता है। बारिश के समय कच्चे रास्ते पर पानी और कीचड़ जमा होने से स्थिति बेहद खराब हो जाती है। पैदल चलना मुश्किल होने के साथ ही शवयात्रा में शामिल बुजुर्गों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है।

ग्रामीणों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी जरूरी व्यवस्था के लिए भी उन्हें खुरई जाना पड़े, यह उनके लिए बेहद पीड़ादायक स्थिति है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शमशान की जमीन का सीमांकन कराकर अतिक्रमण हटाने और शमशान तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता बनवाने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने परिजन की अंतिम विदाई के लिए इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here