बैटरी वाली एक्टिवा से शराब की होम डिलीवरी! फोन पर ऑर्डर, छिपी पेटियों से सप्लाई… आबकारी की गश्त के बीच शहर में कथित नया नेटवर्क
सागर। शराब की अवैध बिक्री रोकने के लिए आबकारी अमला रात में सड़कों पर गश्त कर रहा है, दुकानों पर टेस्ट परचेस हो रहा है और अवैध मदिरापान के मामले बनाए जा रहे हैं। लेकिन इसी बीच शहर की गलियों में शराब की सप्लाई का कथित तरीका बदलने की चर्चा है। अब पेटी लेकर घूमने के बजाय छोटी-छोटी डिलीवरी की जा रही हैं और इसके लिए बैटरी से चलने वाली एक्टिवा जैसी गाड़ियों के इस्तेमाल की बात सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक शनिचरी और शुक्रवारी इलाके में लाल रंग की बैटरी वाली एक्टिवा जैसी गाड़ी को लेकर लगातार चर्चा है। आरोप है कि गाड़ी दिन-रात इलाके में घूमती है और फोन पर मांग मिलने के बाद शराब की छोटी मात्रा पहुंचाई जाती है। दो बोतल, क्वार्टर या जरूरत के मुताबिक माल पहुंचाने का यह तरीका कथित तौर पर इतना सावधानी से अपनाया जाता है कि डिलीवरी करने वाले के पास बड़ी मात्रा में शराब दिखाई ही नहीं देती।
पेटी कहीं और, डिलीवरी कहीं और
शहर में चल रहे इस कथित नेटवर्क का तरीका भी चर्चा में है। आरोप है कि तस्कर एक साथ बड़ी मात्रा में शराब लेकर निकलने के बजाय अलग-अलग स्थानों पर पेटियां छिपाकर रखते हैं। ग्राहक का फोन आते ही छोटी मात्रा निकालकर गाड़ी से पहुंचा दी जाती है। यानी शराब का स्टॉक एक जगह नहीं, बल्कि कई छोटे ठिकानों पर और डिलीवरी अलग रास्ते से।
यही तरीका आबकारी अमले के लिए भी चुनौती बन सकता है। दुकान से बाहर निकलने वाली बड़ी खेप पकड़ना आसान है, लेकिन यदि शराब पहले से अलग-अलग स्थानों पर छिपी हो और सप्लाई छोटी मात्रा में हो तो पूरा नेटवर्क पकड़ने के लिए अलग स्तर की निगरानी जरूरी होगी।
पुराने चेहरे, नया तरीका?
स्थानीय लोगों का दावा है कि इस कथित सप्लाई नेटवर्क में शराब के पुराने कारोबारी सक्रिय हो सकते हैं। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ लोग स्थानीय अमले से अपनी पहचान और संपर्क का फायदा उठाते हैं, जिसके चलते शिकायतें कार्रवाई के स्तर तक नहीं पहुंच पातीं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब सवाल सिर्फ एक लाल बैटरी वाली गाड़ी का नहीं है। सवाल यह है कि यदि शहर में वास्तव में फोन पर शराब की छोटी डिलीवरी हो रही है तो शराब का स्रोत क्या है? पेटियां कहां छिपाई जा रही हैं? डिलीवरी के लिए किन रास्तों का इस्तेमाल हो रहा है? और सबसे अहम—इन गतिविधियों की जानकारी जिम्मेदार विभाग तक क्यों नहीं पहुंच रही?
आबकारी की रात में गश्त
इधर सहायक आबकारी आयुक्त के आदेश पर 8 अगस्त की रात आबकारी अमले ने मकरोनिया-2, सिविल लाइन, गोपालगंज, पुरव्याऊ, मधुकरशाह वार्ड, तिलीगांव और गऊघाट क्षेत्र की मदिरा दुकानों पर रात्रि गश्त एवं टेस्ट परचेस की कार्रवाई की। दुकानों के आसपास अवैध मदिरापान के मामलों में मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 36 के तहत प्रकरण कायम किए गए। अनावश्यक रूप से जमा लोगों को हटाया गया और दुकानों के आसपास लगी हरी मेटी भी हटवाई गई।
लेकिन असली परीक्षा अब दुकानों के बाहर नहीं, शहर की गलियों में है। यदि बैटरी वाली गाड़ी से शराब की होम डिलीवरी की स्थानीय चर्चाओं में दम है तो आबकारी विभाग को दुकानों की निगरानी से आगे बढ़कर कथित डिलीवरी नेटवर्क, छिपे स्टॉक और सप्लाई के स्रोत तक पहुंचना होगा।
क्योंकि सवाल यह नहीं कि रात में दुकान के बाहर कौन शराब पी रहा है…
सवाल यह है कि रात के अंधेरे में शहर के किस कोने से शराब घरों तक पहुंच रही है?


