अपराध अनुसंधान को वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित बनाने मध्यप्रदेश पुलिस की पहल

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अपराध अनुसंधान को वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित बनाने मध्यप्रदेश पुलिस की पहल

भोपाल। अपराधों की विवेचना को अधिक वैज्ञानिक, तार्किक और साक्ष्य आधारित बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय के अपराध अनुसंधान विभाग द्वारा तीन दिवसीय फॉरेंसिक, वैज्ञानिक एवं डिजिटल विवेचना प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला 1 से 3 सितंबर तक आयोजित की जा रही है।

विशेष पुलिस महानिदेशक पंकज श्रीवास्तव के निर्देशन तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों और विवेचकों को आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक, डिजिटल साक्ष्य और वैज्ञानिक अनुसंधान की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग के साथ दोषसिद्धि दर बढ़ाना है।

प्रशिक्षण के दौरान अपराध स्थल से साक्ष्य संकलन एवं संरक्षण, वैज्ञानिक परीक्षण, डिजिटल साक्ष्य के विधिसम्मत उपयोग, आधुनिक अपराध अनुसंधान तकनीकों और फॉरेंसिक साइंस के व्यावहारिक पहलुओं पर जानकारी दी जा रही है।

कार्यशाला के पहले दिन डायरेक्टर फिंगरप्रिंट शाखा मनोज राजपूत ने घटनास्थल से मिलने वाले अस्पष्ट अंगुल चिन्हों को विकसित करने की आधुनिक विधियों, घटनास्थल निरीक्षण, जब्ती प्रक्रिया, विवादित दस्तावेजों में अंगुल चिन्ह परीक्षण तथा NAFIS और MCU प्रणाली से जुड़े विधिक प्रावधानों की जानकारी दी।

पुलिस अधीक्षक सीआईडी ऋतुराज गुप्ता ने प्रश्नगत दस्तावेजों के परीक्षण, हस्ताक्षर एवं हस्तलेख मिलान, जाली दस्तावेजों की पहचान और मानक नमूने एकत्र करने की प्रक्रिया को केस स्टडी के माध्यम से समझाया।

राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो के विशेषज्ञों ने e-Sakshya, e-Vivechana, e-Raksha और ICJS पोर्टल के विवेचना में उपयोग, डिजिटल साक्ष्य अपलोडिंग, केस डायरी के डिजिटाइजेशन तथा कोर्ट-प्रॉसिक्यूशन डेटा के एकीकरण की जानकारी दी।

आगामी सत्रों में फॉरेंसिक भौतिकी, वॉयस, रसायन एवं विष विज्ञान, फॉरेंसिक बायोलॉजी, सीरोलॉजी एवं DNA, क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन, बैलिस्टिक्स, CID फोटोग्राफी और न्यायालयीन प्रमाणीकरण सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण देंगे।

मध्यप्रदेश पुलिस के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से विवेचना की गुणवत्ता में सुधार, वैज्ञानिक साक्ष्यों के अधिकतम उपयोग और आधुनिक तकनीक को पुलिस अनुसंधान एवं न्यायिक प्रक्रिया से प्रभावी रूप से जोड़ने में मदद मिलेगी।

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