भगवान भाव के भूखे हैं, सच्ची श्रद्धा से ही मिलती है उनकी कृपा: आत्मानंद सरस्वती महाराज

सच्चा सुख अंतर मन आत्मा हैसागर। राधे कृष्णा सत्संग परिवार पटकुई स्थित कुबेर वाटिका में श्रीमद भागवत कथा के छठवें दिन नीलगिरी पीठाधीश्वर आत्मानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि भगवान घट-घट वासी है, हर ओर है। द्वारकाधीश, जगन्नाथ, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, बैद्यनाथ सहित अन्य स्थानों पर विराजमान है। भगवान को जब हृदय से याद करते हैं तब वहां प्रकट हो जाते हंै। सभी को शक्ति, सम्पत्ति, समृद्धि का सदुपयोग करना चाहिए। मंदिर में, मूर्ति में भगवान हैं। जब इंसान कहता है भगवान मंदिर में, मूर्ति में नहीं है तब उसका पतन होना निश्चित है। भगवान भाव के भूखे है, जब अच्छे भाव से भगवान की पूजा-पाठ करेंगे तब भगवान खुश होकर आशीर्वाद जरूर देंगे। भगवान हमारे हृदय में बैठे है। संकीर्तन, पूजन करें जिससे भगवान कृपा करें। सेवा, भजन, कीर्तन करते चले जिससे फल मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि सच्चा सुख अंतरमन आत्मा है। जहां दुख कभी नहीं आए, वहीं सच्चा सुख आएगा और आत्मा सच्चा सुख है। मनुष्य कीदष्टि जैसी होगी वैसा ही संसार दिखेगा। जिस ब्राह्मण के जीवन में गाली, अवगुण कपट आ जाता है उसका पतन होना षुरू हो जाता है। इंसान को विषय भोगों में नहीं भटकना चाहिए। मन का भाव भगवान जानते है। जब गरीबी होती है, पैसा भले ही कम होता है लेकिन यदि विचार-भाव अच्छा है तो समय अच्छा आ जाता है। प्रेम का साधन सत्संग है, सतगुरु है। आज का युवा जन्मदिन के दिन मांस, शराब का सेवन करते है और बहुत खुश होते है। बल्कि जन्मदिन में संकीर्तन, गौ सेवा, भजन करना चाहिए। काम, क्रोध छोड़कर भगवान का नाम जप, संकीर्तन करना चाहिए। समाज को महिला को देखने का नजरिया बदलना चाहिए। उसे सम्मान, अच्छे भाव से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु के वचन, वाणी पर पूरा विश्वास रखे। भक्ति में भटकता मन एकाग्र हो जाएगा और परमानंद की अनुभूति होगी। कथा में रुकमणी विवाह, माखन चोरी लीला का प्रसंग सुनाया गया। शनिवार को कथा का अंतिम दिन है। कथा श्रवण करने षिवदास महाराज, मुख्य यजमान दिनेश-पुष्पा शुक्ला, प्रभु दयाल पटेल, मधुभाई, दलसुख भाई, चंद्र भूषण तिवारी, प्रकाश गुरु, जेठाभाई, कुक्कू अवस्थी, भवन भाई, विनोद पटेल, मगन भाई सहित बडी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।

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