महापौर परिषद की बैठक में निगमायुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल, निंदा प्रस्ताव का निर्णय
पूर्व निर्णयों पर कार्रवाई नहीं होने से एमआईसी सदस्यों ने जताई नाराजगी, महापौर सहित सदस्य बैठक से बाहर निकले
सागर। नगर निगम की महापौर परिषद (एमआईसी) की बुधवार को हुई बैठक में महापौर संगीता तिवारी और निगमायुक्त राजकुमार खत्री के बीच चल रही तल्खी खुलकर सामने आई। पूर्व बैठकों में लिए गए निर्णयों पर समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने को लेकर महापौर सहित एमआईसी सदस्यों ने निगमायुक्त की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। बैठक में निगमायुक्त के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव लाकर मुख्यमंत्री, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन, आयुक्त नगरीय प्रशासन, संभागायुक्त और कलेक्टर को पत्र भेजने का निर्णय लिया गया। इसके बाद महापौर सहित एमआईसी सदस्य बैठक से बाहर निकल गए।
नवीन निगम भवन के सभाकक्ष में हुई बैठक में नगर विकास और जनहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। महापौर ने कहा कि पूर्व बैठकों में सात दिन में प्रतिवेदन मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय में प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। इसे महापौर परिषद के निर्णयों की अवहेलना बताया गया। उन्होंने कहा कि कई जनहित के निर्णय लंबित हैं। पार्षदों की समस्याओं और ‘आपकी महापौर आपके द्वार’ कार्यक्रम में नागरिकों द्वारा रखी गई समस्याओं का भी अपेक्षित निराकरण नहीं हुआ है।
डेयरी विस्थापन पर भी सदस्यों ने घेरा
डेयरी विस्थापन के मामले में बताया गया कि कुल 155 डेयरियों में से 125 को नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें 35 डेयरियों ने जियो टैगिंग के प्रमाण के साथ पुनः आवेदन किया है। सदस्य धर्मेंद्र खटीक ने सवाल उठाया कि अब तक सभी डेयरियां विस्थापित क्यों नहीं हुईं, जबकि ऐसे लोगों को भी प्लाट आवंटित किए गए हैं, जिनके पास पशु नहीं हैं। महापौर ने कहा कि डेयरी विस्थापन का काम कागजों तक सीमित है और धरातल पर स्थिति नहीं बदली। निगमायुक्त ने 15 दिन में अपात्र आवंटनों को निरस्त करने की कार्रवाई का आश्वासन दिया।
राजघाट डीसिल्टिंग के लिए समिति की मांग
राजघाट में डीसिल्टिंग कार्य की प्रगति पर जानकारी दी गई कि बड़े क्षेत्र में काम हो चुका है, लेकिन जलस्तर बढ़ने से शेष कार्य प्रभावित हुआ है। सदस्य धर्मेंद्र खटीक ने कार्य की समीक्षा के लिए समिति गठित करने की मांग की।
बड़े प्रोजेक्ट और मूलभूत सुविधाओं पर सवाल
महापौर ने मल्टीलेवल पार्किंग और साबूलाल मार्केट जैसे बड़े प्रोजेक्ट में हो रही देरी पर सवाल उठाए। किशोर न्यायालय आवासीय योजना की हितग्राही स्वाति जैन ने आवास आवंटित होने के बावजूद पानी और बिजली की सुविधा नहीं मिलने की शिकायत की। इस पर महापौर और सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि मूलभूत सुविधाओं के बिना हितग्राही आवास में कैसे रहेंगे।
वृंदावन वार्ड के श्रीराम नगर में जलभराव की समस्या पर सदस्य संगीता जैन ने समयसीमा तय कर निराकरण की मांग की। निगमायुक्त ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया। हॉकर्स जोन में बोर्ड नहीं लगाए जाने और एनकेप के तहत किए गए कार्यों की स्वीकृति एवं जानकारी उपलब्ध नहीं कराने का मुद्दा भी उठा।
चौराहों और अवैध नल कनेक्शन का मुद्दा
भगवान परशुराम चौराहा और लवकुश चौराहा निर्माण को लेकर अब तक कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाए गए। निगम में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजने की कार्रवाई की मांग भी की गई। सदस्य रूपेश यादव ने टाटा पाइपलाइन डालने और अवैध नल कनेक्शनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। निगम अधिकारियों ने बताया कि पिछले माह 100 से अधिक अवैध नल कनेक्शन काटे गए हैं।
बीएलसी योजना की वित्तीय अनियमितताओं पर भी सवाल
बीएलसी घटक योजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में पूर्व में कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का मामला उठा। बताया गया कि जनवरी 2025 और जून 2026 की बैठकों में कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। सदस्य विनोद तिवारी ने कहा कि जांच में देरी के दौरान कई कर्मचारी सेवानिवृत्त और कुछ की मृत्यु भी हो चुकी है। महापौर ने कहा कि निगमायुक्त की ओर से अब तक कार्रवाई से परिषद को अवगत नहीं कराया गया है।
सोलर सिस्टम और एनर्जी ऑडिट भी लंबित
निगम भवन सहित अन्य शासकीय भवनों पर पीपीपी मोड में सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। महापौर ने कहा कि विद्युत बचत और एनर्जी ऑडिट से संबंधित प्रस्ताव लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने रीवा नगर निगम की तर्ज पर सागर में भी कार्रवाई करने का सुझाव दिया। सदस्यों ने इस पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
बैठक में एल्डरमैन के मानदेय भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों की सूची सार्वजनिक करने, आवास योजनाओं में जमा राशि की वापसी तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के अनुरूप उपविधि लागू करने सहित अन्य प्रस्तावों पर भी चर्चा और निर्णय लिए गए।


