MP के उज्जैन में शाही मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाने पर तनाव, नारेबाजी के बीच पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले

0

कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक 15 मीटर चौड़ी सड़क के लिए करीब 10 फीट हिस्सा हटाया गया, कार्रवाई के दौरान पत्थरबाजी में महिला टीआई घायल

उज्जैन। कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया के तहत शाही मस्जिद का सड़क सीमा में आ रहा करीब 10 फीट हिस्सा हटाने की कार्रवाई सोमवार सुबह शुरू हुई। प्रशासन और मुस्लिम समाज के बीच बातचीत के बाद समाज के कुछ लोग स्वयं मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने के लिए मौके पर पहुंचे।

कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने नारेबाजी करते हुए विरोध जताया। स्थिति बिगड़ने की आशंका के बीच पुलिस ने उपद्रव की कोशिश कर रहे लोगों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम समाज के एक वर्ग के लोग आगर नाके पर भी एकत्रित हो गए।

दरअसल, उज्जैन मास्टर प्लान 2035 में कंठाल चौराहा से गोपाल मंदिर तक 15 मीटर चौड़े मार्ग का प्रस्ताव है। सड़क की निर्धारित सीमा में शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा आ रहा था। इसी बाधक हिस्से को हटाने की प्रक्रिया प्रशासन की ओर से की जा रही है।

शहर काजी ने कहा- मस्जिद का मामला सुलझ चुका, अफवाहों पर ध्यान न दें

शहर काजी खलीर्कुरहमान ने मुस्लिम समाज के लोगों से अपील की है कि मस्जिद से जुड़ा मामला रात में ही बातचीत के बाद हल हो चुका है। उन्होंने कहा कि समाजजन अफवाहों पर ध्यान न दें और बिना किसी वजह के बाजार में एकत्रित न हों।

उन्होंने कहा कि जिस बात को लेकर सहमति बनी है, उसके अनुसार प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अफवाहों के कारण घर से बाहर न निकलें और मौके पर जाने से बचें।

कार्रवाई के दौरान पत्थरबाजी, महिला टीआई घायल

कार्रवाई के बीच उपद्रवियों की ओर से पत्थर फेंके जाने की बात सामने आई। इस दौरान क्राइम ब्रांच की महिला टीआई पुष्पा पांचाल को चोट लगने की जानकारी है।

शाही मस्जिद के अंदर भी बाधक हिस्से को हटाने का काम जारी रहा। मौके पर मौजूद समाज के कुछ लोगों ने स्वयं इस हिस्से को हटाने की प्रक्रिया में सहयोग किया।

यह सड़क महाकालेश्वर मंदिर, गोपाल मंदिर और शिप्रा तट को आपस में जोड़ती है। सिंहस्थ 2028 और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के उद्देश्य से मार्ग को चौड़ा करने की योजना है।

मामला हाईकोर्ट पहुंचा, युगलपीठ में आज सुनवाई

शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने की कार्रवाई के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया था। मस्जिद पक्ष का कहना है कि यह धार्मिक स्थल 100 साल से अधिक पुराना है और इससे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज भी मौजूद हैं।

एकलपीठ में याचिका खारिज होने के बाद मस्जिद पक्ष ने मामला युगलपीठ के समक्ष रखा। याचिका में यह भी दावा किया गया कि वर्ष 1975 में यातायात व्यवस्था के लिए मस्जिद की ओर से जमीन उपलब्ध कराई गई थी और उसी जमीन पर 40 फीट चौड़ी सड़क बनी है।

प्रशासन की ओर से शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने की तैयारी के बीच मस्जिद पक्ष की याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर स्थित युगलपीठ में सोमवार को सुनवाई प्रस्तावित है। एकलपीठ करीब 15 दिन पहले याचिका खारिज कर चुकी है।

मस्जिद के अलग-अलग हिस्सों से चार और नौ फीट हटाया जा रहा

प्रशासनिक कार्रवाई के तहत शाही मस्जिद के एक हिस्से से करीब चार फीट और दूसरे हिस्से से करीब नौ फीट क्षेत्र हटाया जा रहा है। इमाम मोहम्मद इब्राहिम की ओर से मस्जिद को 636 साल पुरानी बताया गया है। मस्जिद पक्ष का कहना है कि भवन के किसी हिस्से को हटाने से पूरी संरचना पर असर पड़ सकता है।

शनिवार रात से जुटे थे लोग, पुलिस और आरएएफ तैनात

संभावित कार्रवाई को देखते हुए शनिवार रात से ही बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शाही मस्जिद के अंदर और आसपास मौजूद रहे। रविवार को भी विरोध और नारेबाजी का सिलसिला जारी रहा।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मस्जिद के सामने बैरिकेडिंग कराई। सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ आरएएफ को भी तैनात किया गया।

असदुद्दीन ओवैसी ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी

शाही मस्जिद को हटाने की संभावित कार्रवाई को लेकर एआइएमआइएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इंटरनेट मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वक्फ कानून में संशोधन का उद्देश्य कलेक्टरों और राज्य सरकारों को मस्जिदों, दरगाहों, खानकाहों और कब्रिस्तानों से जुड़े अधिकार मुसलमानों से छीनने की स्थिति पैदा करना है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here