सागर। मध्य प्रदेश शासन द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के संबंध में अध्ययन एवं परीक्षण हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनपरामर्श बैठकें आयोजित कर रही है। इसी कड़ी में सागर में समाज के विभिन्न वर्गों, विधि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ सीधे संवाद का महत्वपूर्ण कार्यक्रम संपन्न हुआ।
बैठक में मौजूद सागर विधायक श्री शैलेंद्र जैन ने यूसीसी को आज की आवश्यकता बताया। उन्होंने देश की वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि, “मैं समझता हूँ कि जिस तरह पूरे देश में एक समान कानून और संविधान पूरी तरह से लागू है वैसे ही वर्तमान परिस्थितियों में, समान नागरिक संहिता (UCC) आज के समय की एक बेहद महत्वपूर्ण आवश्यकता और जरूरत बन गई है।” उन्होंने संवाद और संवेदनशीलता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार को सभी से विचार-विमर्श करके इसे लागू करना चाहिए और किसी की भावनाएं आहत न हों, इसका ख्याल अवश्य रखना चाहिए।
उन्होंने सभी के लिए समान नियम होने की बात की और उल्लेख किया कि ‘भारतीय दंड संहिता’ (IPC) एक समान कानून का ही एक रूप है, जिसे सब मानते हैं।
जिले के प्रबुद्ध जनों में श्री सुखदेव मिश्रा ने यूसीसी का समर्थन और सामाजिक समरसता की बात करते हुए कहा कि ऐसी प्रथा जो समाज को विभाजित करें वह समाज हित या देशहित में नहीं। श्री अनिल तिवार ने कहा कि यूसीसी की जो बैठक जिले स्तर पर आयोजित हो रही हैं वे गाँव में भी आवश्यक रूप से हों साथ ही इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए जिससे सभी व्यक्तिय यूसीसी के बारे में जागरूक हों। डॉ ज्योति चौहान ने यूसीसी लागू होने पर मातृ और शिशु स्वास्थ्य पर होने वाले सकारात्मक प्रभाव के बारे में सभी को अवगत कराया। श्री शैलेश केसरवानी ने कहा कि हर एक व्यक्ति का बराबर का अधिकार होना ही चाहिए और वे समान नागरिक संहिता का समर्थन करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि गाँव और ब्लॉक स्तर तक ऐसी बैठकें आयोजित होनी चाहिए।
बैठक में जिले के विभिन्न वर्गों, क्षेत्रों से शामिल हुए अन्य प्रबुद्धजनों ने भी अपने विचार रखे। कई व्यक्तियों ने यूसीसी को ‘मातृशक्ति के लिए समानता और उनके सम्मान के लिये भी आवश्यक बताया। महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान देने के साथ ही यह सामाजिक न्याय के लिए भी जरूरी है। बैठक में विभिन्न समुदायों के लिए यूसीसी के संभावित प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की। कुछ लोगों ने इसे एक प्रगतिशील कदम बताया जो लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करेगा, जबकि कुछ अन्य ने अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए सावधानी बरतने की आवश्यकता व्यक्त की। समग्र रूप से, बैठक में सभी पक्षों ने एक सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा की और अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम संचालन डॉ अमर जैन ने किया।
आम नागरिक 15 जून तक https://Ucc.mp वेबसाइट पर भी दे सकते हैं अपने सुझाव
समिति के सदस्य श्री अनूप नायर ने बैठक में स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश शासन समाज के हर वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित करना चाहता है। जो नागरिक इन बैठकों में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाए हैं, वे सीधे शासन की आधिकारिक वेबसाइट ucc.mp.gov.in पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से समान नागरिक संहिता के संबंध में अपने बहुमूल्य विचार और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।


