सागर में रिश्वत मामले में वनरक्षक दोषी, 4 साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माना

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सागर में रिश्वत मामले में वनरक्षक दोषी, 4 साल की सजा और 10 हजार रुपए जुर्माना

सागर। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामले में विशेष न्यायालय सागर ने वनरक्षक राजकुमार मौर्य को दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर तीन माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

मामला वर्ष 2023 का है। न्यायालय के रिकॉर्ड के अनुसार राजकुमार मौर्य दक्षिण सागर वन मंडल कार्यालय में वनरक्षक के पद पर पदस्थ थे। आरोप था कि इमारती लकड़ी के व्यापार के लिए किए गए ऑनलाइन आवेदन के पंजीयन प्रमाण-पत्र के बदले 10 हजार रुपए रिश्वत की मांग की गई थी। शिकायत के बाद लोकायुक्त ने कार्रवाई की।

16 जून 2023 को शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच रिश्वत को लेकर बातचीत रिकॉर्ड की गई। इसके बाद 21 जून 2023 को ट्रैप कार्रवाई की गई। न्यायालय के रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के कब्जे से 4 हजार रुपए की रिश्वत राशि बरामद हुई थी।

मामले में लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान रिश्वत की राशि के नोटों पर पाउडर की कार्रवाई और रासायनिक परीक्षण सहित अन्य साक्ष्य जुटाए गए। जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था।

विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सागर ने 29 सितंबर 2026 को निर्णय सुनाते हुए राजकुमार मौर्य को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7(क) के तहत दोषसिद्ध किया और चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। मामलें में शासन की ओर से पैरवी एलपी पटेल ने की।

न्यायालय ने यह भी दर्ज किया कि दोषी की कोई पूर्व आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं थी और उसके विरुद्ध पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, हालांकि इन परिस्थितियों के बावजूद न्यायालय ने निर्धारित सजा सुनाई।

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