नौरादेही में शुरू हुआ चीता अध्याय, 439 हेक्टेयर में तैयार हुआ नया बसेरा; बुंदेलखंड में पर्यटन और रोजगार को मिलेगी रफ्तार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन समारोह में पहुंचे सागर, 439 हेक्टेयर क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा के इंतजाम

सागर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को सागर के मुहली पहुंचे, जहां उन्होंने वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन समारोह में हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कूनो नेशनल पार्क से लाए गए दो चीतों को नौरादेही में उनके नए ठिकाने के लिए रिलीज किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजनीतिक संदर्भ में कहा, “एक पप्पू हमारे यहां है। पप्पू मानता ही नहीं है। समझ में ही नहीं आता है।” उन्होंने कहा कि देश के लिए यह अच्छा समय चल रहा है और दुनिया भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों की सत्ता चली गई है, वे सत्ता पाने की चाह में कुछ भी कर रहे हैं। उन्होंने सभी को सद्बुद्धि मिलने की कामना भी की।

नौरादेही में अब चीतों का नया बसेरा

कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब नौरादेही में भी चीतों को बसाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसी क्रम में कूनो से लाए गए दो चीतों को मुहली रेंज में तैयार किए गए क्षेत्र में छोड़ा गया।

चीतों के लिए मुहली रेंज में पांच बोमा तैयार किए गए हैं। करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में चीतों की सुरक्षा, निगरानी और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाएं की गई हैं। वन विभाग की टीम लगातार इनकी गतिविधियों पर नजर रखेगी।

गाइड ट्रेनिंग सेंटर खोलने की मांग

कार्यक्रम के दौरान रहली विधायक गोपाल भार्गव ने मुहली में गाइड ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करने की मांग रखी। उनका कहना है कि स्थानीय युवाओं को विभिन्न भाषाओं और पर्यटन से जुड़ी जानकारी का प्रशिक्षण देकर गाइड के रूप में तैयार किया जा सकता है। इससे क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

विधायक ने स्थानीय स्तर पर विस्थापित लोगों के लिए लघु उद्योग शुरू करने की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई।

पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद

कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार, नौरादेही में चीतों का आगमन केवल वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे सागर और पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पर्यटन बढ़ने से रोजगार के अवसर और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की संभावना है।

चीतों की सुरक्षा के लिए तैयार किए गए करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र में वन विभाग की टीम निगरानी करेगी। विभाग की ओर से चीतों की सुरक्षा के साथ उनके स्वास्थ्य और गतिविधियों की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी।

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