सागर में जर्जर भवन पर कार्रवाई, सड़क पर मलबा छोड़कर निकली निगम टीम, दो दिन से आवागमन अवरुद्ध
जनचिंगारी- सागर। बरीयाघाट वार्ड स्थित भवन क्रमांक 325/263/1 लंबे समय से जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था और उस पर कब्जे की स्थिति भी बताई गई थी। निर्धारित कार्रवाई के तहत 18 सितंबर को राजस्व अमले और नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर भवन को सुरक्षा की दृष्टि से गिरा दिया। कार्रवाई से पहले संबंधित कब्जाधारियों के ताले खुलवाकर भवन के अंदर रखी सामग्री का पंचनामा तैयार किया गया था।
भवन गिराने की कार्रवाई में सागर तहसीलदार, पटवारी, नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर बघेल, निगम इंजीनियर, प्रभारी अतिक्रमण, सहायक अतिक्रमण अधिकारी सहित पुलिस प्रशासन और नगर निगम की अतिक्रमण टीम मौजूद रही। कार्रवाई के दौरान निगम के डिप्टी कमिश्नर बघेल स्वयं जेसीबी पर नजर आए और भवन गिराने की कार्रवाई में रुचि लेते दिखे।
लेकिन कार्रवाई के बाद निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जर्जर भवन गिराना जरूरी था, लेकिन सड़क पर भारी मात्रा में मलबा छोड़कर टीम के चले जाने से कोतवाली से मोतीनगर जाने वाली मुख्य सड़क पिछले दो दिनों से तंग गली में तब्दील हो गई है। सड़क पर मलबा पड़ा होने से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि यदि निगम ने कार्रवाई में इतनी तत्परता दिखाई तो सड़क से मलबा हटाने की जिम्मेदारी भी उसी गंभीरता से निभानी चाहिए थी यह सम्बंधित को निर्देशित करना था। आरोप है कि सड़क का मलबा हटाने के बजाय अब ट्रस्ट पीछे की ओर पड़े मलबे को हटाने में लगा हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सार्वजनिक सड़क को बाधित करने वाले मलबे को तत्काल हटाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
चुनिंदा जर्जर भवनों पर ही कार्रवाई क्यों?
शहर में कई जर्जर और खतरनाक भवन अब भी मौजूद हैं। ऐसे में नगर निगम की कार्रवाई को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि जर्जर भवनों की पहचान और कार्रवाई के लिए समान मापदंड क्यों नहीं अपनाए जा रहे हैं। बीते दिनों विजय टॉकीज रोड पर भी एक जर्जर भवन नगर निगम की कार्रवाई का इंतजार करते-करते खुद ही धराशायी हो गया था। गनीमत रही कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, इन मामलों में सब से अधिक चर्चा प्रभारी उपायुक्त बघेल और कोई इंजीनियर चतुर्वेदी की हो रही हैं।
सभी जर्जर भवनों को गिराना सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के बाद सड़क और सार्वजनिक स्थान को मलबे से मुक्त कराना भी उतना ही जरूरी है। बरीयाघाट की घटना में अब लोगों का सवाल सीधा है, भवन तो गिरा दिया, सड़क पर पड़ा मलबा कब हटेगा?


