भागीरथपुरा दूषित पानी कांड: रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई नहीं, उमंग सिंघार ने उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने एफआईआर दर्ज करने और इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव के इस्तीफे की मांग की; 600 से अधिक पन्नों की न्यायिक आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

इंदौर। मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने शुक्रवार को इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल की वजह से हुई मौतों के मामले को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बावजूद अब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। सिंघार ने कहा कि इंदौर जैसे बड़े शहर में पेयजल व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है।

सिंघार ने दूषित पानी की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। साथ ही उन्होंने इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव से इस्तीफा देने को कहा।

रिपोर्ट आई, लेकिन कार्रवाई पर सवाल

इंदौर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान सिंघार ने कहा कि भागीरथपुरा में पेयजल संकट को लेकर विस्तृत जांच कराई गई थी। उनके मुताबिक, न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद भी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मामले में तत्काल कदम उठाने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। सिंघार का दावा है कि दूषित पानी की घटना को कई महीने बीत जाने के बाद भी आम लोगों के साथ-साथ सरकारी अस्पतालों में उपचार करा रहे मरीजों को साफ पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

इंदौर की जल व्यवस्था पर सिंघार ने उठाए सवाल

विधानसभा में सरकार की ओर से साफ पेयजल उपलब्ध कराने को लेकर दिए गए आश्वासनों का उल्लेख करते हुए सिंघार ने कहा कि इसके बावजूद लोगों को पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने कहा कि इंदौर नगर निगम का सालाना बजट करीब 8,500 करोड़ रुपये है। इसके बावजूद शहर की पेयजल व्यवस्था को लेकर ऐसी स्थिति सामने आना चिंता का विषय है। सिंघार ने इंदौर में पानी की स्थिति की तुलना अफ्रीका के छोटे गांवों से की।

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शुरू से नहीं चाहती थी कि भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक हो।

विजयवर्गीय, महापौर और पार्षद को बचाने का आरोप

सिंघार ने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव तथा क्षेत्रीय पार्षद कमल बघेला को बचाने के लिए जांच के दौरान असहयोग और कथित हेरफेर किया गया।

उन्होंने कहा कि पूर्व हाई कोर्ट जज सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में गठित एक सदस्यीय न्यायिक आयोग ने मामले की जांच की थी।

पाइपलाइन से जुड़े दस्तावेज नहीं देने का दावा

सिंघार के मुताबिक, आयोग ने पेयजल और सीवरेज पाइपलाइन से संबंधित दस्तावेज मांगे थे, लेकिन उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने न्यायिक आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भागीरथपुरा में पाइपलाइन प्रोजेक्ट के टेंडर जारी होने से लेकर काम पूरा होने तक कुल 859 दिनों की देरी हुई।

सिंघार ने दावा किया कि इस देरी में 66 दिन ऐसे रहे, जब महापौर पुष्यमित्र भार्गव के स्तर से फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए गए।

उन्होंने सवाल उठाया कि फाइल 66 दिनों तक क्यों लंबित रही और इसके पीछे क्या वजह थी। सिंघार ने यह भी सवाल किया कि क्या पाइपलाइन का ठेका हासिल करने वाली कंपनी से कथित कमीशन के लिए फाइल रोकी गई थी।

सीवेज और पेयजल पाइपलाइन अगल-बगल बिछाने का उल्लेख

600 से अधिक पन्नों की न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में भागीरथपुरा की पाइपलाइन व्यवस्था को लेकर भी गंभीर तथ्य दर्ज होने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सीवेज और पेयजल की पाइपलाइनें नियमों और निर्धारित मानकों का पालन किए बिना एक-दूसरे के पास बिछाई गई थीं। इसके चलते सीवेज का पानी पेयजल में मिल गया।

रिपोर्ट में दूषित पानी के नमूनों में ई. कोलाई (E. coli) और टोटल कोलीफॉर्म जैसे बैक्टीरिया पाए जाने का उल्लेख है। ऐसे पानी के सेवन से गैस्ट्रोएंटेराइटिस, उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आईं।

भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई के कारण लोगों के बीमार पड़ने के मामले दिसंबर 2025 में सामने आए थे।

कांग्रेस का दावा- 36 लोगों की मौत

कांग्रेस पार्टी का दावा है कि भागीरथपुरा में दूषित पानी से फैले इस प्रकोप में 36 लोगों की मौत हुई।

वहीं, न्यायिक आयोग की रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य विभाग को 12 फरवरी तक भागीरथपुरा में 35 लोगों की मौत की जानकारी मिली थी। इनमें से 22 मौतों को दूषित पेयजल की आपूर्ति से संभवतः जुड़ा हुआ माना गया था।

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