विशेष माफी के तहत आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों को मिली रिहाई, जेल अधीक्षक ने समाज और परिवार के लिए बेहतर जीवन जीने की दी सीख
सागर। महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर सागर केंद्रीय जेल से पांच बंदियों को रिहा किया गया। मध्यप्रदेश शासन के जेल विभाग की रिहाई नीति के अंतर्गत आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे बंदियों को विशेष माफी मिलने के बाद यह कदम उठाया गया। रिहा किए गए पांच बंदियों में चार सागर केंद्रीय जेल में और एक बंदी खुली जेल सागर में निरुद्ध था।
रिहाई के दौरान जेल अधीक्षक रमेशचंद्र आर्य ने बंदियों से भविष्य में किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि जेल में रहने के दौरान बंदियों ने जो कौशल और प्रशिक्षण प्राप्त किया है, उसका इस्तेमाल अब परिवार की आजीविका चलाने के साथ समाज के लिए सकारात्मक कार्यों में किया जाना चाहिए।
सामाजिक संगठन ने दिए धार्मिक पुस्तक और मफलर
बंदियों की रिहाई के मौके पर सामाजिक संगठन रामसरोज समूह सागर के सदस्य शैलेष केशरवानी और मोनी केशरवानी भी मौजूद रहे। संगठन की ओर से रिहा हुए बंदियों को गीतगीता पुस्तक, गंगाजल की बोतल और ‘महाकाल’ लिखा मफलर भेंट किया गया।
रिहा हुए बंदी गोकल पिता मोती अहिरवार को लेने के लिए उनके परिजन जेल नहीं पहुंच सके। ऐसी स्थिति में रामसरोज समूह के सदस्यों ने उन्हें उनके निवास तक पहुंचाने की व्यवस्था की।
इन पांच बंदियों को मिली रिहाई
सागर केंद्रीय जेल से यशवंत उर्फ हल्लू पिता गौरीशंकर गौड़, दुरगसिंह पिता मुन्नी सिंह लोधी, नारायण उर्फ नारान पिता राजधर आदिवासी और गोकल पिता मोती अहिरवार को रिहा किया गया।
वहीं, खुली जेल सागर में निरुद्ध बलीराम उर्फ बली पिता मुलुआ यादव को भी विशेष माफी के तहत रिहाई दी गई।


